जैसे अब्दुल कलामजी ने कहा की भारत के बाहरजाते ही भरातीय हर नियम को मानता हे.एसा क्यों.?हम चाहतें हें की हमारा देश भी साफ़ सुधरा हो ......लेकिन चाहने से क्या होता है......जब तक हम लोग अपनी तरफ़ से कुछ नही करेंगे ...कुछ नही होने वाला......
एक बार मेने अपने दोस्त से जब यह बात कही तोह जवाब मिला "अरे सब करते हें ..तोह हम क्यों न करे.एक मेरे ही सफाई से क्या होगा"......ओ भई आप अपने से शुरुवात तोह करो......अगर हम हर काम के लिए ऐसेबोलते रहंगे तोह बदलाव कौन लायेगा......किसी को तोह शुरुवात करनी ही होगी ...अगर हम अपना देश साफ़ चाहते हैं तोह पहले अपने बच्चों को सिखाएं की बचे टोफ्फी खा कर कागज़ नीचे न फेंके ....रोड पर सु सु ..न करे ...रोड पर थूक्का न करो ........लेकिन नही एसा तोह हम कर ही नही सकते ....और कंही किसीं ने एसा करने को कहा .......आप को नही आप के बच्चे को तोह आप भड़क जाते हो यह कहके "तू बड़ी आई सफाई वाली .....मेरे बचे के कागज़ डालने से क्या यहाँ गन्दगी फेलती है?सब तो डालते है .सब से क्यों नही बोलती?"ओह मेरी माँ.....में सब को नही जानती ...तू मेरी दोस्त है ..इसलिए आप के बच्चे से कहा.....गलती हो गई ..माफ़ कर दे .....बचे आंटी से गलती हो गई ....देखो टोफ्फी खा कर ..कागज़ जहाँ खड़े हो वहीं डालना.......जैसा सब करते हें आप भी वैसा ही करो ....."
मन करता हें की बोलू (साली ......)जब टीवी में सुंदर साफ़ जगह दिख ते हें....तब बोलती हो की "काश मैं उस जगह पैदा हुई होती ...जगह हो तोह ऐसे हो ...मज़ा आ जाए ......काश अपना देश भी साफ़ होता......"कैसे हो भई ?देश चाहिए साफ़ ....पर अपने तरफ़ से कुछ नही करना......कोई करना चाहे तोह उसका मजाक उडाना ....
मुन्सिपल वालों ने कहा की कूड़ा अलग अलग कर के डालो ....कांच ,लोहा एक जगह रसोई का कूड़ा,कागज़ एक में ...यहां तक की कूड़ा डालने के लिए अलग अलग सुविधा भी प्रदान किया......लेकिन नही हम ऐसा क्यों करे ?तब मुनिसिपल वालोने कूड़ा लेना बंद कर दिया ..और फिर से सब को कूड़ा अलग अलग डालने को कहा... वरना कूड़ा नही लिया जाएगा .....लिकिन हम लोग भी महान हें ...जो कूड़ा लेने आता है ....उसके हाथ दस रुपए थमाया और बोले "भैय्या जरा संभाल लेना......और कूड़ा उठा लेना.....हर महीने दे दिया करेंगे ......"और मेरे जैसे बेफकूफ अभी भी कूड़ा अलग अलग फेंगते है ......हमारे सर पे जूते पड़े ......और यह सुना पड़ता है की ओ भई "आप तोह महान व्यक्ति हो......और हम लोग साधारण ...हमें जीने दो "(मतलब की "ओये .....अपनी बकवास अपने पास ही रखा करो......हमें मत सुनाया कर........")हाहाहा
Friday, July 17, 2009
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